हेलोवीन दिवस ईसाईयों का एक त्यौहार होता है जोकि अक्टूबर के आखिरी रविवार को मनाया जाता है. अलग – अलग धर्मों के त्यौहार अलग – अलग प्रकार के होते है जैसे हिन्दुओं में होली, राखी, दशहरा एवं दिवाली, राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि और भी कई त्यौहार मनाये जाते है, इस्लाम में ईद – उल – फितर, बकरीद, मुहर्रम आदि और सिख में वैसाखी, गुरुनानक जयंती आदि उसी प्रकार ईसाईयों में भी कई प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है जैसे क्रिसमस, गुडफ्राइडे, इस्टर और उन्हीं का एक त्यौहार हेलोवीन दिवस भी है. इस त्यौहार को ज्यादातार अमेरिका, इंग्लैंड व यूरोपीय देशों के लोग मनाते है, लेकिन इस त्यौहार की शुरुआत आयरलैंड एवं स्कॉटलैंड से हुई है
हेलोवीन दिवस को आल हेलोस इवनिंग, आलहेलोवीन, आल हेलोस ईव और आल सैंट्स ईव भी कहा जाता है. यह दिन सेल्टिक कैलेंडर का आखिरी दिन होता है. इसलिए सेल्टिक लोगों के बीच यह नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है. विभिन्न लोग जिसे हम अब “सेल्ट्स (celts)” के रूप में देखते है पहले पूरे यूरोप में रहते थे, लेकिन समय के साथ आज आयलैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स, ब्रिटनी और कॉर्नवाल आदि क्षेत्रों में निवास करने के लिए जाने जाते है.
इतिहास के अनुसार लगभग 2000 या उससे अधिक साल पहले प्रसिद्ध धार्मिक त्यौहार <strong>‘</strong><strong>आल सेट्स डे</strong><strong>’</strong> पूरे उत्तरीय यूरोप के देशों में 1 नवम्बर को मनाया जाता था. लेकिन कुछ और सूत्रों के अनुसार हेलोवीन का इतिहास प्राचीन सेल्टिक त्योहार जिसे सम्हैन कहा जाता है से संबंध रखता था. इस दिन गैलिक परम्पराओं को मानने वाले लोग इस त्यौहार को मनाते है और यह फ़सल के मौसम का आखिरी दिन होता है और इस दिन से ठंड के मौसम की शुरूआत होती है. वे इस बात पर बहुत ज्यादा भरोसा करते है कि इस निर्धारित दिन पर मरे हुए लोगों की आत्माएँ उठती है और धरती पर प्रकट हो कर जीवित आत्माओं के लिए परेशानी पैदा करती हैं. इन बुरी आत्माओं से डर भगाने के लिए लोग राक्षस जैसे कपड़े पहनते हैं. इसके अलावा अलाव जलाया जाता है और मरे हुए जानवरों की हड्डियाँ उसमें फेंक दी जाती है. कहा जाता है कि आधुनिक इरिश, वेल्श और स्कॉट्स के लोग उनकी गैलिक भाषाओँ के रूप में सेल्टिक लोगों के वंशज हैं.
इसे आल सैंट्स डे भी कहा जाता है जोकि 1 नवंबर को मनाया जाता है जोकि मूर्तिपूजकों (pagans) के परिवर्तन के लिए ईसाईयों द्वारा बनाया गया था. आल सैंट्स डे से पहले आल हेलोस ईव की शाम होती है. जोकि अब हेलोवीन ईव के नाम से जाना जाता है. इस उत्सव में मूर्तियों की पूजा की जाती थी, लेकिन कुछ पोप्स ने इसे दुसरे ईसाई धर्म के साथ मिलाने की कोशिश की, और नतीजा यह निकला कि आल सेंटस डे और हेलोवीन डे एक ही दिन मनाया जाने लगा
इस दिन लोग हेलोवीन दिवस की पार्टी में बहुत से खेल खेलते हैं जिसमे से सबसे ज्यादा खेला जाने वाला खेल डंकिंग या एप्पल बोबिंग है जिसे स्कॉटलैंड में डूकिंग कहा जाता है. जिसमें सेब को एक टब या पानी के बड़े बेसिन में तैराते है और फिर प्रतिभागियों को अपने दांतों से इसे निकालना होता है. इसके अलावा भी बहुत से खेल खेले जाते है. हेलोवीन पर कुछ परम्परागत गतिविधियाँ भी होती हैं जैसे भविष्यवाणी. इस गतिविधि के अनुसार और अपने भविष्य के पति या पत्नी के बारे में पता लगाने के लिए एक लम्बी सी पट्टी में सेब बनाते है इसके बाद इसके छिलके को किसी एक के कंधे पर टॉस करके गिराते हैं. यदि छिलका जमीन पर किसी अक्षर के आकार में गिरता है तो कहते है कि यह उसके साथी के नाम का पहला अक्षर है.
इसके अलावा हेलोवीन थीम के आकार की कैंडी, हेलोवीन केक, नोवेल्टी कैंडी का आकार जैसे खोपड़ी, कद्दू, चमगादड़ और कीड़े आदि, कद्दू, कद्दू पाई, कद्दू ब्रेड, पॉपकॉर्न, पौंड केक, कद्दू की प्यूरी के साथ भरा हुआ रामेकिन्स, भुने हुए कद्दू के बीज एवं स्वीट कॉर्न और आत्माओं के केक आदि. ये सारे प्रकार के व्यंजन भी हेलोवीन दिवस पर खाए जाते है
इसके आलावा आज के समय में हेलोवीन दिवस को लोग फन के रूप में मनाते है पहले के समय में इस दिन मरे हुए लोगों की मूर्तियों की पूजा की जाती थी, किन्तु आज के समय में लोग बहुत सी खेल और गतिविधियां कर इस त्यौहार को मनाते हैं.
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Taylor Wong
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The Japanese call it Hanakotoba, and King Charles II brought it to Sweden from Persia in the 17th century. Read More
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